• May 31, 2022

हिंदी पत्रकारिता दिवस: लोकतंत्र का चौथे स्तंभ

हिंदी पत्रकारिता दिवस: लोकतंत्र का चौथे स्तंभ

पत्रकारिता जिसे मीडिया भी कहा जाता है को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में दर्जा मिला है। मीडिया लिखित, मौखिक या दृश्य किसी भी रूप में हो सकती है जनता को जानकारी देती है कि किस जगह कानूनों का उल्लंघन हो रहा है तथा सभी अपनी जिम्मेवारी तथा निष्ठा से कार्य कर रहे हैं या नही। इस जानकारी के पश्चात निर्णय लेने की पूरी शक्ति जनता के विवेक पर निर्भर करती है। मीडिया जो कि जनता तथा शासन दोनों के बीच एक माध्यम का काम करता है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाता है। इस प्रकार लोकतंत्र इन चार स्तंभो पर टिका है इन चारों स्तंभो की मजबूती मिलकर एक मजबूत लोकतंत्र का निर्माण करती है। पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है, जिसमें समाचारों का एकत्रीकरण, लिखना, जानकारी एकत्रित करके पहुँचाना, सम्पादित करना और सम्यक प्रस्तुतीकरण आदि सम्मिलित है।

लेखक एवं पत्रकार मदन मोहन भास्कर

पत्रकारिता के भी अनेक माध्यम हो गये हैं जैसे – अखबार, पत्रिकायें, रेडियो, दूरदर्शन, वेब-पत्रकारिता आदि। बदलते वक्त के साथ बाजारवाद और पत्रकारिता के अन्तर्सम्बन्धों ने पत्रकारिता की विषय-वस्तु तथा प्रस्तुति शैली में व्यापक परिवर्तन किए।भारत में अक्सर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा होती रहती है। मीडिया किसी भी देश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम लोगों को इस बारे में शिक्षित किया जाता है कि समाज में क्या हो रहा है और उन मुद्दों और घटनाओं के बारे में जो उनके जीवन को प्रभावित करते हैं। प्रेस स्वतंत्रता एक बहुत गंभीर मुद्दा है और उन्हें महत्व दिया जाना चाहिए। हमारे आसपास हो या छोटे-बड़े शहरों में, अलग-अलग राज्यों में या फिर देशो-दुनिया में क्या हो रहा हैं, इसकी जानकरी हमें पत्रकारिता journalism के कारण ही मिलती हैं। पत्रकारिता के कारण ही देशो-दुनिया की छोटी-बड़ी ख़बरों से, घटनाओं से परिचित हो पाते है।

पत्रकारिता मतलब समाज के मुद्दों को उठाना, जनता की आवाज बनकर उनके हकों के लिए सरकार से लड़ना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना, सरकारों की गलत नीतियों को जनता के सामने लाना और सच क्या हैं यह जनता को बताना यह हैं. वास्तविक में देखा जाए तो पत्रकारिता एक ऐसी शक्ति हैं, जो किसी भी सत्ता को हिला कर रख सकती हैं. लेकिन अगर यही पत्रकारिता जिम्मेदारियों के साथ नहीं की जाए तो जनता, समाज और सरकार के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती हैं। अखबारों को पत्रकार अपनी पूरी मेहनत और लगन से इकट्ठा करके हम लोगों तक पहुंचाते हैं जिससे देश की जनता पढ़कर जागरूक हो सके।

हिंदी पत्रकारिता दिवस क्यों मनाते है-

हिंदी भाषा में ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नाम से पहला समाचार पत्र 30 मई 1826 में निकाला गया था। इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। इसके प्रकाशक और संपादक भी वे खुद थे।
हिंदी पत्रकारिता दिवस प्रेस की आजादी के प्रारंभिक सिद्धांतों का जश्न मनाने, दुनिया भर में प्रेस की आजादी की स्वतंत्रता के मूल्यांकन के लिए और उन आक्रमणों से मीडिया को बचाने के लिए जो प्रेस की आजादी के लिए खतरा बन रहे हैं, इन सभी के लिए दिवस मनाया जाता है। पत्रकारिता दिवस उन पत्रकारों को सलाम करने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्य की ज़िंदगी में अपना जीवन को खो दिया है। यह नागरिकों को प्रेस की स्वतंत्रता के उल्लंघन के बारे में सूचित करने के लिए एक सूचना के रूप में कार्य करता है। यह एक दुख:द तथ्य है कि दुनिया भर के कई देशों में प्रकाशनों पर जुर्माना, निलंबन, सेंसर की रोक लगाई जाती है और संपादकों, प्रकाशकों और पत्रकारों पर हमला किया जाता है तथा उन्हें हिरासत में लिया जाता है, परेशान किया जाता है और यहां तक ​​कि हत्या भी कर दी जाती है। यह प्रेस आजादी के अनुमोदन में पहल को विकसित करने और प्रोत्साहित करने के लिए और दुनिया भर में प्रेस की आजादी की स्थिति का आकलन करने के याद किया जाता है और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए तथा इन्हे प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
पत्रकारिता में लोकप्रिय होने के लिए नहीं आना चाहिए बल्कि पत्रकार का कर्तव्य होता है कि वो सच्चाई की पता लगाकर जनता को दिखाये।

पत्रकारिता का उद्देश्य

पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सेवा होना चाहिए। लोकतंत्र की सफलता या विफलता उसके पत्रकारिता पर आधारित रहती है। पत्रकार की पहली निष्ठा जनता के प्रति होनी चाहिए और स्वतंत्र रहकर किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत, दलों, संगठनों,राजनैतिक लोगों व पार्टियों के दबाव में नहीं आना चाहिए बल्कि सच्चाई को उजागर करना चाहिए।

आज भी हजारों ऐसे मुद्दे है जिन्हें उठाया ही नहीं जाता है,
गरीबों की गरीबी,मजबूरों की मजबूरी को बताया ही नहीं जाता है।

 

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