• September 15, 2022

क्या है गंगा दशहरा और इसकी पूजा – विधि

क्या है गंगा दशहरा और इसकी पूजा – विधि

इंटरनेट डेस्क। हिन्दू धर्म मेंगंगा नदी को सबसे ऊँचा दर्जा दिया गया हैऔर इसीलिए गंगा जल को सबसे पवित्र जल माना जाता है जिसका उपयोग हिंदू अनुष्ठानों पूजा – पाठ में करते है कहते है गंगा नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है , आज हम बात करेंगे गंगा नदी के अवतरण दिन को जो की गंगा दशहरा के नाम से मनाया जाता है। जो की दशमी तिथि या हिंदू पंचाग के अनुसार ज्येष्ठ के महीने में चंद्रमा के उज्ज्वल आधे के दसवें दिन आता है। गंगा दशहरा देवी मां को सर्मपित दिन है। और इसका उपयोग सभी हिंदू अनुष्ठानों के लिए करते हैं। आज हम जानेंगे की गंगा दशहरा क्यों कब मनाया जाता है,और इसका महत्व क्या है।तो आइये जानते है।

गंगा दशहरा क्या है और इसे मनाने की तिथि :-
गंगा दशहरा माँ गंगा को समर्पित है और मान्यता है की देवी गंगा को धरती पर लाने के लिए ऋषि भागीरथ को ध्यान लगाने कठोर तपस्या करने के बाद माँ गंगा नदी स्वर्ग से धरती पर ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में उतरी थी। और इसी दिन को हिन्दू धर्म में गंगा दहशरा के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है गंगा का अवतरण।गंगा दशमी का त्यौहार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से लेकर दशमी तकऔर शुक्ल दशमी पर समाप्त होता है। इस त्यौहार को बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

पूजा विधि –
गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करे और स्वच्छ वस्त्र धारण करे। स्नान करते वक्त ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः जाप करे , इसके बाद हवन करे जिसमे ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै स्वाहा का जाप अवश्य करे ,और ऊँ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं (वाक्-काम-मायामयि) हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा करते हुए मंत्र से पांच मिठाई और फूल चढ़ा कर गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ का और जहाँ से वे आयी हैं, उस हिमालय का नाम- मंत्र का जाप करते हुए पूजा करे इसके बाद फिर 10 फल, 10 दीपक और 10 सेर तिल लेकर गंगायै नमःका उच्चारण करने हूए दान करें। साथ ही पिण्ड जल में घी मिले हुए सत्तू और गुड़ डालें। और माँ गंगे का ध्यान करे और पूजा के बाद अपने क्षमता अनुसार दान दक्षिणा दे सकते है।

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