• September 12, 2022

क्या है शारदीय नवरात्री का महत्व और इसकी पूजा विधि

क्या है शारदीय नवरात्री का महत्व और इसकी पूजा विधि

इंटरनेट डेस्क। नवरात्री हिन्दू धर्म का एक विशेष त्यौहार है वैसे तो हिन्दू धर्म में अनेको त्यौहार मनाये जाते है जिनका अपना एक विशेष महत्व होता है किन्तु नवरात्री नौ दिनों तक मनाये जाने वाला त्यौहार है। हिंदू धर्म के पंचाग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है जो शुक्ल पक्ष के नवमी तक मनाई जाती है. शारदीय नवरात्रि को शरद नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। माँ दुर्गा के भक्त बहुत बेसब्री से नवरात्री का इन्तजार करते है और नवरात्री आते है भक्त माँ दुर्गा के आगमन की तैयारियां शुरू कर देते है , इन् नौ दिनों के दौरान भक्त उपवास रखते है।और नौ दिनों तक माँ के अलग अलग रूपों की पूजा अर्चना करते है। आज हम जानेंगे की शारदीय नवरात्री महत्व क्या है और इसकी पूजा विधि क्या है तो आइये जानते है।

शारदीय नवरात्रि की पौरांणिक मान्यता :-
शारदीय नवरात्री की कथा पौराणिक काल से भगवान राम से जुडी हुई है। नवरात्री के दसवे दिन दशहरा मनाया जाता है और रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी। लेकिन उससे पहले नौ दिन तक पौराणिक मान्यता अनुसार शारदीय नवरात्रि के दौरान भगवान राम ने लंका पर विजय पाने के लिए नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा – आराधना की थी . इस पर भगवान राम की भक्ति से प्रसन्न होकर माँ दुर्गा ने उन्हें विजय होने का आशीर्वाद दिया और दसवें दिन भगवान राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी.और इसी कारण शारदीय नवरात्री के दसवे दिन दशहरा मनाया जाता है इसलिए ऐसी मान्यता कि जो लोग शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की विधि विधान पूजा – अर्चना करते हैं उन पर मां दुर्गा की सदैव विशेष कृपा द्रुष्टि बनी रहती है।

शारदीय नवरात्रो की पूजा विधि
नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को सर्वप्रथम प्रातः जल्दी उठकर स्नान करे , और साफ़ स्वच्छ वस्त्र पहने । इसके बाद पूजा स्थान की अच्छे से सफाई करे और प्रथम पूज्य भगवान गणेश का ध्यान करते हुए । कलश स्थापना के लिए मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं, और एक तांबे के कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। कलश के ऊपरी हिस्से में मोली का धागा बांधें, फिर कलश में जल भरे और उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं ,इसके बाद श्रद्धा क्षमता के अनुसार रुपये, दूर्वा, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें। कलश पर अशोक या आम के पांच पत्ते लगाकर नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांधकर कलश के ऊपर रख दें। अब कलश को मिट्टी के उस बर्तन के बीच में रखे । कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्प लिया जाता है। कलश स्थापना के सतह ही अखंड जोत जलाया जाता है जो की नवरात्री के नौ दिनों तक लगातार प्रज्वल्लित रहती है। इन् नौ दिनों माँ दुर्गा के अलग अलग रूपों की पूजा करे और माँ दुर्गा का ध्यान करे। और अंतिम दिन अष्टमी और नवमी की महातिथि को परायण पूजा करके ज्वारों का विसर्जन करके कंजक पूजा करके कंजको को भोजन कराके खुद फल ग्रहण करे।

नवरात्री में न करे ये गलतियां :-
– नवरात्री में नौ दिनों तक किसी प्रकार की गंदगी नहीं रखना चाहिए , और नवरात्री का उपवास रखने वालो को क्रोध , मोह , लोभ , जैसी कुप्रवृतियो को नहीं रखना चाहिए ,और ब्रह्म मुहूर्त स्नान। भूलकर भी शराब , मास , अंडे आदि का सेवन न करे ना ही घर में लाये , और उपवास रखने वालो को बेड या पलंग पर सोना चाहिए , अन्न का सेवन करने से बचना चाहिए ,

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