• September 17, 2022

2022 में कब है छठ मैया की पूजा जानिए है इस व्रत की पूजा विधि और शुभ- मुहर्त

2022 में कब है छठ मैया की पूजा जानिए है इस व्रत की पूजा विधि और शुभ- मुहर्त

इंटरनेट डेस्क। हिन्दू धर्म में बहुत से तीज त्यौहार मनाये जाते है जिनके पीछे पौराणिक मान्यताएं जुडी हुई है , वैसे ही छठ पूजा है हिन्दू धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्त्व है छठ माता का व्रत सबसे कठिन व्रत होता है मान्यता है की जो भी इस व्रत को पुरे विधि विधान से पूरा करता है उसे सुख समृद्धि धन ऐश्वर्य का छठ मैया वरदान देती है। पंचाग के अनुसार पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। इस त्यौहार को बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है इस दिन में छठी मैया और भगवान सूर्य की उपसना का विधान है। यह पर्व चार दिन तक रहता है इस पर्व में महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि ,संतान प्राप्ति ,के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।

छठ पूजा 2022 तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा मनाई जाती है। और 2022 में छठ पूजा 30 अक्टूबर 2022 सुबह 05:49 से आरम्भ हो रही है और 31 अक्टूबर 2022 , सुबह 03:27 तक रहेगी। जिस वजह से छठ पूजा पर्व 30 अक्टूबर के दिन ही मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार छठ पर्व के दिन यानि 30 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 5:37 होगा और अगले दिन, 31 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 06:31 होगा।

छठ पूजा 2022 तिथि
छठ पूजा 2022 प्रारंभ: 28 अक्टूबर ,(शुक्रवार नहाय खाय)

: 29 अक्टूबर , ( शनिवार छठ पूजा खरना )

30 अक्टूबर , (रविवार छठ पूजा संध्या अर्घ्य दिया जायेगा )

31 अक्टूबर (सोमवार छठ पूजा का समापन होगा )

छठी व्रत पूजा की सम्पूर्ण विधि :-
1. व्रत की शुरुआत :- छठ पूजा व्रत की शुरूआत नहाय खाय से की जाती है इस दिन अपने नाम के अनुसार ही छठ व्रती को नहाय के नियमों का पालन करना होता है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाये किसी नदी या तालाब में स्नान करती है और छठ व्रत करने का संकल्प लेती हैं। इसके पश्चात् कद्दू चने की सब्जी, चावल, सरसों का साग का सेवन करती हैं। इसके अगले दिन खरना किया जाता है।

2. छठ पूजा खरना
खरना ( शुद्धिकरण). खरना को लोहंडा भी कहा जाता है. खरना के दिन छठ पूजा का विशेष प्रसाद बनाने की परंपरा है.इस दिन व्रत रखने वाली महिलाये पूरे दिन निराहार रहती है और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर, पूरी बनाकर छठ माता को भोग लगाती हैं। इसी प्रसाद को ग्रहण करके व्रती छठ व्रत समाप्त होने तक निराहार रहकर व्रत का पालन करते हैं। खरना के अगले दिन डूबते सूर्य को नदी, तलाब के किनारे अर्घ्य दिया जाता है। यह इस व्रत का पहला अर्घ्य भी होता हैं।

3 . संध्या कालीन अर्घ्य
संध्या कालीन अर्ध्य के समय नदी तट पर बांस की बनी टोकरी में मौसमी फल, मिठाई और प्रसाद में ठेकुआ, गन्ना, केले, नारियल, खट्टे के तौर पर डाभ नींबू और चावल के लड्डू रखे जाते हैं। इस टोकरी को लोग सिर पर रखकर नदी किनारे पर लेकर जाते हैं। सिर पर लेकर जाने का उद्देश्य प्रसाद को सम्मान पूर्वक छठ माता को भेंट करना है।

4. इस तरह दिया जाता है अर्घ्य
छठ घाट की तरफ महिलाएं हाथों में अगरबत्ती, दीप, जलपात्र और रास्ते में छठ माता के गीत गाती हुई जाती हैं। घाट पर पहुंचकर व्रती कमर तक जल में प्रवेश करके सूर्य देव का ध्यान करते हैं। सूर्यास्त के होने लगते हैं तब अलग-अलग बांस और पीतल के बर्तनों में रखे प्रसाद को तीन बार सूर्य की दिशा में दिखाते हुए जल से स्पर्श कराते हैं। और यही प्रक्रिया अगले दिन उगते हुए सूर्य के सामने करते है और परिवार के लोग प्रसाद पर लोटे से कच्चा दूध अर्पित करते हैं।

5. केराव का प्रसाद
केराव का प्रसाद इस व्रत में सबसे महत्व प्रसाद होता है पूजन समाप्त होने के बाद व्रती घाट के ऊपर आकर छठ मैय्या की कथा सुनते हैं और पानी में भिगोये हुए केराव को प्रसाद के तौर पर बांटते हैं। और पवित्र वस्त्र धारण करके व्रती अपने अपने घर लौटते हैं और भोजन ग्रहण करते हैं। पूजा होने के बाद छठ घाट पर लोगों को प्रसाद बांटने की भी परंपरा है।और इस तरह छठ मैय्या का ये कठिन व्रत पूर्ण होता है।

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