• August 12, 2022

जानें अनुब्रत मंडल कैसे बने मछली विक्रेता से बीरभूम के बेताज बादशाह!

जानें अनुब्रत मंडल कैसे बने मछली विक्रेता से बीरभूम के बेताज बादशाह!

मुंबई। मवेशी तस्करी कांड में CBI के हाथों नाटकीय ढंग से गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के बाहुबली नेता अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) को करीब से जानने वाले बताते हैं कि वह पहले मछलियां बेचा करते थे। वहीं से आगे चलकर न सिर्फ तृणमूल के प्रभावशाली नेता बने बल्कि अरबों की संपत्ति के मालिक भी हो गए। पिता की किराने की दुकान थी। अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) ने आठवीं तक की पढ़ाई की। उसके बाद पिता की दुकान संभालने लगे। बाद में दुकान छोड़कर मछली का व्यवसाय शुरू किया। उसी समय राजनीति में शामिल हुए। अनुब्रत कांग्रेस से जुड़ गए। उस समय ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) भी कांग्रेस में ही थीं। उसी समय ममता की नजर अनुब्रत पर पड़ी।

अनुब्रत बहुत जल्द ममता के खास लोगों में से एक बन गए। ममता प्यार से उन्हें ‘केष्टो कहकर बुलाती हैं। 1998 में जब तृणमूल कांग्रेस का गठन हुआ तो अनुब्रत भी उसमें शामिल हो गए। उस समय तृणमूल के बीरभूम जिलाध्यक्ष चिकित्सक सुशोभन बंद्योपाध्याय थे। ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) को युवा तृणमूल का जिलाध्यक्ष बनाया था। कुछ महीने बाद एक विवाद को लेकर सुशोभन ने तृणमूल छोड़ दी। ममता ने उनकी जगह अनुव्रत को उस पद पर बिठा दिया। अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) उस समय से इस पद पर हैं। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक बीरभूम जिले में कौन पार्टी का उम्मीदवार होगा, अनुब्रत से बातचीत किए बिना पार्टी नेतृत्व यह तय नहीं करता है।

2019 के अप्रैल महीने में अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) की मां पुष्पारानी मंडल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उसके अगले साल ही अनुब्रत की पत्नी छवि मंडल की भी कैंसर से मौत हो गई थी। अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal) के परिवार में अब बस उनकी एकमात्र लड़की सुकन्या है।अनुब्रत अपने बेबाक व विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं। एक बार उन्होंने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि विरोधी दलों के लोगों की कलाई काट देंगे तो एक बार पुलिस की गाड़ी पर बम मारने की बात कहकर सबको चौंका दिया था। तृणमूल के खेला होबे (अब होगा खेल) के नारे को अनुव्रत मंडल (Anubrata Mondal)ने ही लोकप्रिय बनाया था। पिछले बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह नारा दिया गया था। उनके मुंह से यह नारा निकलते ही लोकप्रिय हो गया था। उसके बाद चुनावी फिजा में खूब गूंजा था।

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