• July 26, 2022

MS Dhoni-Amrapali Group: धोनी को SC ने भेजा नोटिस, आम्रपाली ग्रुप से जुड़ा है मामला

MS Dhoni-Amrapali Group: धोनी को SC ने भेजा नोटिस, आम्रपाली ग्रुप से जुड़ा है मामला

स्पोर्ट्स डेस्क। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) को सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है. आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) का फ्लैट्स की डिलीवरी को लेकर एक विवाद चल रहा है, जिसपर सोमवार (25 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसी दौरान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ा मामला भी सामने आया। दरअसल, महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) को आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) की तरफ से 150 करोड़ रुपये का बकाया लेना है, दूसरी ओर ग्राहकों को उनके फ्लैट्स नहीं मिल रहे हैं, ऐसे में यह मामला सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इसी के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) और महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) को नोटिस जारी किया है।

 

बता दें कि आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) और महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) से जुड़ा यह केस पहले दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा था, जहां पर हाईकोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया था। रिटायर्ड जस्टिस वीणा बीरबल की अगुवाई में बनी इस कमेटी के जिम्मे मामले को सुलझाने का काम था। जब कमेटी का गठन किया गया, उसके बाद ही पीड़ितों द्वारा इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया था। सर्वोच्च अदालत में हुई सुनवाई के दौरान पीड़ितों की ओर से यह दलील दी गई थी कि आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) के पास फंड की कमी है, इसलिए उनके द्वारा बुक करवाए हुए फ्लैट नहीं मिल पा रहे हैं।

पीड़ितों का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने जिस कमेटी का गठन किया गया है, उसके सामने महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) अपने बकाए 150 करोड़ रुपये का मामला ले गए हैं। महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) के ब्रांड एंबेसडर थे, जिसके लिए उनके 150 करोड़ रुपये बकाया हैं। लिहाजा पीड़ितों ने तर्क दिया कि अगर आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) एमएस धोनी के बकाये को की इतनी बड़ी रकम देने में पैसे खर्च करेगा तो उनके फ्लैट अटके रह जाएंगे। यही कारण है कि अब सुप्रीम कोर्ट ने महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) और आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) को नोटिस जारी किया है और अपना पक्ष रखने को कहा है। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने अभी मध्यस्थता कमेटी की सुनवाई या किसी तरह के एक्शन पर रोक नहीं लगाई है।

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